पारंपरिक गोपालन को बढ़ावा, समाज को गौ के लाभ से जोड़ना
हम भारत की प्राचीन गोपालन परंपरा को पुनर्जीवित करने का संकल्प रखते हैं। गौ माता केवल एक पशु नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, अर्थव्यवस्था और आध्यात्मिकता का केंद्र हैं।
रासायनिक मुक्त, प्राकृतिक दूध का उत्पादन और वितरण
वैदिक विधि से निर्मित शुद्ध गौ-घी
पूजा-पाठ, यज्ञ और कृषि में गोबर का उपयोग
पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा
हमारा लक्ष्य है कि देश का हर परिवार गौ-सेवा से सीधे जुड़े। इसके लिए हमने एक सरल योजना बनाई है:
प्रत्येक परिवार से मात्र ₹31 प्रति माह का अंशदान। यह राशि इतनी कम रखी गई है कि हर परिवार आसानी से दे सके।
प्रत्येक सदस्य परिवार को साल में एक बार 1 किलो शुद्ध गौ-घी और गोबर के उपले घर तक पहुँचाए जाएँगे।
जो लोग सदस्य नहीं बन सकते, वे चारा दान के माध्यम से गौ-सेवा में भाग ले सकते हैं:
| दान प्रकार | राशि | लाभ |
|---|---|---|
| 1 दिन का चारा | ₹101 | एक गाय का एक दिन का पूरा पोषण |
| 5 दिन का चारा | ₹501 | एक गाय का पाँच दिन का पोषण + ई-प्रमाणपत्र |
| 30 दिन का चारा | ₹3,001 | एक गाय का एक महीने का पोषण + विशेष प्रमाणपत्र |
हम निम्नलिखित माध्यमों से समाज को गौ के लाभ बताएँगे:
गाँव-गाँव में जाकर गोपालन के लाभ बताना
स्कूल-कॉलेज में गौ-संस्कृति के बारे में शिक्षा
गौ-आधारित उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण
हम एक ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जहाँ हर परिवार गौ माता से सीधे जुड़ा हो, गौ की सेवा को परिवार की दैनिक दिनचर्या का हिस्सा माने, और गौ से प्राप्त शुद्ध उत्पादों का लाभ उठाए। हम चाहते हैं कि भारत की गौवंश की विलुप्त होती नस्लों का संरक्षण हो और पारंपरिक गोपालन पद्धति फिर से प्रचलित हो।